माइंड स्पेशलिस्ट्स / भारत में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोविड-19 लॉकडाउन का प्रभाव

भारत में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोविड-19 लॉकडाउन का प्रभाव

कोविड-19 के प्रसार के कारण दुनिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए, ऐसा लगता है कि जीवन में सब कुछ उलझ कर रह गया है। भारत की स्थिति भी ऐसी ही है। एहतियात के तौर पर और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए, भारत सरकार ने 24 मार्च 2020 को पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की थी। इस महामारी में बच्चों और किशोरों जैसे सबसे कमज़ोर समूहों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालने की क्षमता होती है।

किशोरों के जीवन पर कोविड-19 के प्रकोप और लॉकडाउन के कई प्रभाव पड़ सकते हैं – जैसे कि कोई पुराना और तीव्र तनाव, उनके परिवारों की चिंता, अप्रत्याशित हानि, स्कूली शिक्षा में अचानक और तेजी से बदलाव, और घर में बंद रहने के कारण इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अधिक स्क्रीन टाइम बिताना, आमने-सामने बैठकर बातचीत न कर पाना, व्यायाम की कमी और आलस्य, घर में झगड़ा और यहां तक कि घरेलू हिंसा, उनके परिवार और देश के आर्थिक भविष्य की चिंता इत्यादि।

किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोविड-19 की महामारी के प्रभाव को समझने के लिए, राहत चैरिटेबल एंड मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट की एक पहल, माइंड स्पेशलिस्ट्स ने भारत के किशोरों के साथ एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया। किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोविड-19 के प्रभाव का आकलन करने के लिए 12-19 वर्ष की आयु के समूह से 354 उत्तरदाताओं के कुल सैम्पल के साथ एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया गया।

इस सर्वेक्षण के परिणामों को जानने के लिए डाउनलोड करें यह रिपोर्ट।