भावनात्मक उपचार

आमतौर पर लोगों से यही उम्मीद की जाती है कि वह सहजता से अपने मनोवैज्ञानिक घावों से बाहर निकल सकें। हालांकि, कोई भी व्यक्ति जिसने दुःख या दर्द का अनुभव किया हो या अकेलेपन का सामना किया हो, वह इसका साक्षी बन सकता है। उसके लिए यह पूरी तरह मुमकिन नहीं होता है क्योंकि भावनात्मक घाव शारीरिक घावों से भी भयंकर हो सकते हैं। यह सच है कि शारीरिक घाव भर सकते हैं या कम से कम मरहमपट्टी करके कुछ समय के लिए उनसे आराम पाया जा सकता है, लेकिन बहुत कम लोग ये जानते हैं कि भावनात्मक समस्याओं का सामना कैसे करना है। इस हुनर को सीखने से हम ज़रूरत पड़ने पर अपने प्रियजनों की मदद कर सकते हैं।

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