माइंड स्पेशलिस्ट्स / हमारे कार्यक्रम

हमारे कार्यक्रम

We offer a wide selection of programs that focus on the holistic development of individuals and society. The themes of our topics range from the day to day, like interpersonal relationships to specific activities like dealing with trauma.

C4MH क्या है?

C4MH क्या है?

यह संख्याएं आँखों को चौंका देने वाली है – 10 में से 1 भारतवासी अपने जीवन में कभी न कभी किसी गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित होता है, और 10%  जन संख्या इससे किसी भी समय प्रभावित होती है। लगभग 75% लोग न तो अपनी बीमारी को समझ पाते हैं, और न ही मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवओं का उपयोग कर पाते हैं।  (स्रोत: NIMHANS नैशनल मेंटल हैल्थ सर्वे  रिपोर्ट 2016-2017)।

ऐसे लाखों लोग हैं जो उन समस्याओं को बिना कुछ कहे झेल रहे हैं, जिनका इलाज बहुत ही आसान और प्रभावशाली  है। इस बढ़ती समस्या के बावजूद भी, भारत अपने स्वास्थ्य बजट का कुल 0.06% हिस्सा मानसिक स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च करता है।  (भारत की जन संख्या: 132.42 करोड़, स्वास्थ्य बजट: 48,853 करोड़, मानसिक स्वास्थ्य बजट: 23.93 करोड़.- जनगणना 2016, यूनियन बजट 2016-2017)।

भारत में हर घंटे एक छात्र आत्महत्या करता है।[1] कितने ही युवा अपनी जान गवां चुके है और कितनी ही मानव एवं राष्ट्रीय क्षमताएं बर्बाद हो गई हैं – इस सभी का कारण है वो कलंक जो मानसिक रोगों के साथ जुड़ा हुआ है जिसकी वजह से व्यक्ति को अपने आस-पास वालों का ही साथ नहीं मिल पाता हैं।

तो आखिर इसका समाधान क्या है?

इसका समाधान है कि इसके बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जागरूकता फैलाई जाए, लोगों की क्षमताओं का निर्माण किया जाए, खुद की सहायता करने के तरीके सीखे जाएँ और इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए बढ़ती हुयी टेलिकॉम टेक्नोलाजी का इस्तेमाल किया जाए।

WHO के अनुसार युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए “सरकारी निवेश के साथ-साथ सामाजिक, स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी क्षेत्रों के द्वारा युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर संपूर्ण, संगटित और प्रमाण-आधारित कार्यक्रम अनिवार्य हैं”।

इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए, माइंड स्पेशलिस्ट्स ने लेडी इरविन कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) के विकास संचार एवं विस्तार विभाग और रिचमंड फ़ेलोशिप सोसाइटी (दिल्ली) के साथ मिलकर C4MH (कैम्पेन फॉर मेंटल हैल्थ) का आरंभ किया है।

इस कैम्पेन में समाज, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों से जुड़े संगठनों, पेशेवरों और व्यक्तियों का एक नेटवर्क बनाया जा रहा है जो मिलकर मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता की मुहीम चलाएंगे, ताकि भारत में मानसिक स्वास्थ्य को देखने का नज़रिया बदला जा सके।

इस कैम्पेन का उद्देश्य है कि लोगों तक पूरी जानकारी पहुंचा कर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी ख़ामोशी को तोड़ा जाए और एक सम्मिलित वातावरण बनाया जाए ताकि हर व्यक्ति अपनी मानसिक परेशानी के बारे में दुसरो से बात कर सके।

हमारा मानना है कि ऐसा वातावरण बनाने के लिए पहला कदम है प्रभावशाली संचार और सही जानकारी जो भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुप्पी को तोड़ सकता है।

कैम्पेन के अंतर्ग्रत, हम मानसिक बीमारियों और उनसे जुड़े कलंक की जानकारी के विषय में ट्रेनिंग मटेरियल, पोस्टर्स, फिल्म्स और आविष्कारी संचार उपकरणों (जैसे कि कॉमिक स्ट्रिप्स, पारंपरिक खेल जैसे कि लूडो, सांप-सीड़ी और तम्बोला आदि) का निर्माण करते हैं।

NGOs में काम करने वाले व्यक्तियों के लिए हम क्षमता विकास जैसी वर्कशॉप का भी आयोजन कर रहे हैं ताकि वह मानसिक बीमारियों पर सही जानकारी पा सके और हमारे संचार उपकरणों उपयोग करना सीखे। इस प्रशिक्षण द्वारा वे अपने समुदायों तक मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ख़ामोशी और गलत धारणाओं को तोड़ने का सन्देश लोगों तक पहुंचा सकते हैं।

अपने प्रशिक्षणों के द्वारा, हम जनसाधारण और समुदायों के लिए कार्य करने वाले कर्मचारियों को मानसिक बीमारियों की पहले से ही पहचान करने और बेहतर जीवन के लिए स्वयं सहायहता के सही तरीकों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।

इस अभियान में हम सक्रिय रूप से युवाओं के साथ भी काम कर रहे हैं, खासकर कॉलेज स्टूडेंट्स के साथ, ताकि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाई जा सके और वह खुद के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी प्रोत्साहित कर सकें।

हम दुनिया भर में जागरूकता फैलाने, क्षमता विकास करने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कलंक को मिटाने के लिए समान विचारों वाली संस्थाओं, NGO और सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं।

हमारा पूरा ट्रेनिंग मटेरियल और संचार उपकरण हमारी वेबसाइट पर अंग्रेज़ी व हिन्दी, दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं। यह सारी जानकारी पूरी तरह निशुल्क है और इसका इस्तेमाल कॉपीराइट मामलों को ध्यान में रखते हुए, जागरूकता फैलाने के लिए किया जा सकता है।

इस कैम्पेन के आरंभ होने के कुछ ही समय में, 12 सहभागी संस्थाओं ने हमसे हाथ मिलाया और सामान्य मानसिक बीमारियों को समझने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए पारंपरिक खेलों के इस्तेमाल के विषय में अपने प्रतिनिधियों को हमारे पास ट्रेनिंग के लिए भेजा है। उन्होंने अपने समुदायों में सिर्फ एक महीने के समय में (20 अक्टूबर, 2018 तक) जागरूकता फैलाने वाले 32 कार्यक्रमों का आयोजन करके इस कैम्पेन को आगे बढ़ाया है।

C4MH विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस उत्सव

यह कैंपेन ने ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ 9 अक्टूबर, 2018 को लेडी इरविन कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) में मनाया था। इस कार्यक्रम का विषय “अकेले नहीं है हम – मानसिक स्वास्थ्य पर चुप्पी को मिलकर करें कम”।

‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ के उत्सव के नेत्रित्व में, इस कैम्पेन में ऐसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गयीं जिनमें देश भर के लोगों ने लघु फिल्में, कविता लेखन, नारे और पोस्टर्स के लिए “अकेले नहीं है हम – मानसिक स्वास्थ्य पर चुप्पी को मिलकर करें कम” के विषय में अपनी प्रविष्टियाँ भेजी हैं। हमें 11 राज्यों से सभी आयु वर्ग की प्रविष्टियाँ मिली हैं, जिनमें सबसे कम उम्र वाले प्रतियोगी 7 वर्ष और सबसे अधिक उम्र वाले प्रतियोगी 60 साल तक के हैं। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अपनी रुचियों और विचारों को व्यक्त करने के लिए इस प्रतियोगिता में भाग लिया। इन प्रविष्टियों को उनके तकनीकी विषय, साहित्य संबंधी विषय और अभिरूप के आधार पर उन प्रतिष्ठित न्यायधीशों द्वारा आंकलन किया गया, जो अपने काम के क्षेत्र में प्रसिद्द हैं। इस प्रतियोगिता के पुरस्कार कार्यक्रम वाले दिन ही दिए गए।

C4MH के सहभागी NGO जिन्होंने अपने समुदायों में मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान का आयोजन किया था उन्हें भी इस ख़ास मौके पर सम्मानित किया गया। बच्चों के एक समूह ने समाज से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य के कलंक पर आधारित एक ज़ोरदार नुक्कड़ नाटक का भी प्रदर्शन किया। लेडी इरविन कॉलेज की एक छात्रा द्वारा लोगों की भावनाओं, गुस्से और शांति पर आधारित एक उड़ीसी नृत्य भी पेश किया गया था।

इस कार्यक्रम में एक ‘गेमिंग ज़ोन’ भी था जहाँ लोगों को ख़ास मानसिक स्वास्थ्य पर बनाये गए पारंपरिक खेल जैसे लूडो और स्टापू खेलने का मौका दिया गया, और साथ ही यहाँ एक ‘स्टोरी टेलिंग ज़ोन’ भी था जिसमें लोग मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की कहानियाँ पढ़ और सुन सकते थे। इस कार्यक्रम में लोगों के लिए एक ‘सेल्फी एंड वेल्फी ज़ोन’ भी था जिसके ज़रिये वह “आप अकेले नहीं हैं” के विषय पर तसवीरें खींच कर या शार्ट वीडियोस बना कर सोशल मीडिया पर डाल सकते थे।

दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर श्री नजीब जंग इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की भूमिका में आये और स्टेट मेंटल हैल्थ अथॉरिटी के सेक्रेटरी डा. निमेश जी. देसाई और डा. आर.जी. आनंद- जो नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स के सदस्य हैं, वह इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल थे।  इस कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्द प्रेरक वक्ता, ब्रह्माकुमारी सिस्टर शिवानी ने भी एक अहम् भूमिका निभायी और ‘अपने मन और संबंधों को कैसे नियंत्रित करें’ इसके विषय में बात की।

इस कार्यक्रम में 1000 लोगों में से 500 के करीब स्टूडेंट्स थे जिन्होंने डा. अवदेश शर्मा के नेत्रित्व में मानसिक स्वास्थ्य के लिए शपथ ली।

C4MH की शपथ:

हम शपथ लेते हैं कि हम अपने परिवार, काम करने की जगह और समुदाय में मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने के लिए:

  • अपनी मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी में वृद्धि करेंगे
  • यह जानकारी दूसरों में बाँटेंगे
  • स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देंगे
  • दूसरों के मानसिक स्वास्थ्य को बनायें रखने में मदद करेंगे
  • मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी गलत धारणाओं का खंडन करेंगे

[1]https://www.hindustantimes.com/health-and-fitness/every-hour-one-student-commits-suicide-in-india/story-7UFFhSs6h1HNgrNO60FZ2O.html